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बार्सिलोना

बार्सिलोना हमेशा से ही शिल्प, जीवनशैली, खान-पान, फैशन, संगीत और अच्छे समयों का केन्द्र रहा है। सप्ताह भर चलने वाले 'फिस्टा फन' के साथ गर्मियाँ मौजमस्ती भरा होता है। लेकिन साल के अन्य समयों में यह शहर शान्त ही रहता है। कैटेलोनिया की ये राजधानी चारों ओंर से घिरा एक मध्यवर्ती शहर है। ऐसा सिर्फ इसके भौगोलिक स्थिति के कारण ही नही बल्कि इससे भी ज्यादा इसके इतिहास, परम्परा और संस्कृति के प्रभावों के कारण है।।

बार्सिलोना, आइबेरियन प्रायद्वीप के पूर्वोत्तर तटपर और भूमध्यसागर के किनारे बसा है। यह आकार एवं जनसंख्या दोनों में ही स्पेन का दुसरा सबसे बड़ा शहर है। स्पेन के १७ स्वशासित अंचलों में से एक कैटेलोनिया की यह राजधानी भी है। बार्सिलोना में मान्यताप्राप्त दो भाषायें बोली जाती है, एक कैटेलन जो कि आमतौर पूरे कैटेलोनिया में बोला जाता है और दुसरी कास्टिलियन स्पैनिश। बार्सिलोना शहर की जनसंख्या १५,१०,००० है, लेकिन अगर इसमें आसपास के क्षेत्रों को जोड़दिया जाय तो यह संख्या बढ़कर ४०,००,००० हो जायेगी। यहाँ के कुछ दर्शनीय स्थानों की सूची

ला राम्बला : पाँच अलग-अलग रास्तों के संगम पर स्थित ला राम्बाला ( लास राम्बलास के नाम से भी जाना जाता है )में पेड़ों की कतारों से सजे पगदंडी, जीवन्त प्रतिमायें, घुम-घुमकर लॉटरी टिकट से लेकर गहनें बेचने वाले तक मिलते हैं। ला राम्बला के दुसरे हिस्से में स्थित चिड़ियों के बाजार में रुकना लाभदायक हो सकता है, क्योंकि प्लाओ डि ला विरैना नजदीक ही है, जिसमें कला एवं मनोरंजन और टिकट का एक कार्यालय है। अगला दरवाजा ला राम्बला का सबसे रंगीन बाजार ' दि मेरकाट डि ला बोक्वैरिया' है। ला राम्बला के अगले भाग में 'दि ग्रेन टियेटर डेल लिस्यू' है, जो कि १९ वीं सदी की एक मशहूर ओपेरा हाउस है। प्लेका रियेल के बाद ला राम्बला गंदगी से भड़ा है। ला राम्बला 'दि लॉफ्टी मोनुमेंट ए कोलोम' ( कोलम्बस की याद में ) और बन्दरगाह पर आकर खत्म हो जाता है। आप इस मोनुमेंट पर लिफ्ट से चढ़ सकते हैं। मोनुमेंट के पास ही पश्चिम में, ' अविंगुदा डि लेस ड्रासेनेस' पर रॉयल शिपयार्ड ( स्टैन्ड दि रेयाल्स ड्रासानेस )है, जहाँ म्यूजियो मारिट्म है। यहाँ समुंद्र से जुड़ी वो सभी चीजें, जो ज्वार-भाटा को नापने के लिये जरुरी है, वो आपको मिलेंगी जैसे - नाव, नक्सा, चित्र, जहाज से जुड़ी सांख्यकि और १६ वीं सदी की गैलेरी।

बारी गोटिकः बारी गोटिक में मध्यकालिन गोथिक महलों की झलक मिलती है। यह ला राम्बला के पूर्वोत्तर में कुछ ही दुरी पर है और यह प्राचीन बार्सिलोना का केन्द्र है। यहाँ कई कैफे और बार मिलेंगे और साथ ही साथ यहाँ शहर में सबसे सस्ते आवास भी उपलब्ध होते हैं। ज्यादातर घर १४ वीं और १५ वीं सदी के बीच के हैं। स्पेन के महान गिरजाघरों में से एक कैटेड्राल के आसपास आज भी प्राचीन दीवारों का अंश देखने को मिलता है। ये प्लेका डि सान्त जाउमें के आसपास स्थित है, जो कि एक व्यस्त बाजार और 'सरडाना' नृत्य के साप्ताहिक आयोजन स्थलों में से एक है। शहर के दो सबसे विख्यात महल अजुन्टामेनट और पलाउ डि ला गेनेरालिटेट यहीं हैं।

म्यूजियो पिकासोः बार्सिलोना में सबसे ज्यादा पर्यटक म्यूजियो पिकासो संग्राहलय ही आते हैं। यह कैरेर डि मोन्टकाडा में पत्थरों से सजे तीन बहुत ही आकर्षक घरों में में बनाया गया है। कैरेर डि मोन्टकाडा मध्यकाल में बन्दरगाह जाने का रास्ता था। संग्राहलय प्राचीन काल के कलाकारों के कलाकृतियों का दर्शाता है, खासकरके नीलयुग के कैनवास जैसे 'दि डिफेन्सलेस' और १८९० से पहले की रचनायें। इसका दुसरा तल बार्सिलोना और पेरिस के १९००-१९०४ समय की आकर्षक कलाकृतियों को दिखाता है। सेन्योरा के गुलाबी समय की दि हन्टिंग पोर्ट्रेट (१९०५) भी दर्शन के लिये उपलब्ध है।

ला सग्राडा फेमिलियाः यह दुनिया भर में बार्सिलोना की पहचान है। ला सग्राडा फेमिलिया सचमुच में उत्साहित करने वाला स्थान है। ईवन एक्सपियेटोरी डे ला सग्राडा फेमिलिया गाउडी के विख्यात कलाकृतियों में से एक है और उनके महान कल्पनाशक्ति का एक उदाहरण है। १८८२ में एफ. डेल विलार द्वारा प्रारम्भ किये गेये एक निउ-गोथिक परियोजना के स्थान पर गाउडी ने इसकी नींव रखी और इसे पूरा करने के लिये उन्हौने अपनी सारी जिन्दगी लगा दी। उनके आकस्मिक मृत्यु के कारण उनके द्वारा यह कार्य असम्पूर्ण ही रह गया। ७ जून १९२६ को गाउडी गेरोना मे ग्रान विया को पार करते वक्त उन्हे सड़क पर एक गाड़ी ने धक्का मार दिया और तीन दिन तक बेहोस रहने के बाद ७४ साल की उम्र में उनकी मृत्यू हो गयी। लेकिन निर्माण कार्य जारी रहा। १९३६ में स्पेनिश गृह-युद्ध के समय गाउडी द्वारा बनाये गये डिजाइन आदि को जला देने के कारण निर्माण कार्य रुक गया। १९५२ में कार्य फिर से प्रारम्भ किया गया। १९५४ से १९७६ के बीच इसके पश्चिम दिशा के चारों स्तम्भ और महल का बाहरी हिस्सा तैयार हो गया। १९८७ में मूर्तिकार जोसेफ एम. सुबिरेक्स ने भी परियोजना दल मे शामिल होकर 'पोर्टल आफ पैशन' में अपना योगदान किया। आजकल इसे और म्यूजियो डेल टेम्पल एक्सपियाटोरी डि ला सग्राडा फेमिलिया को पर्यटकों के लिये खोल दिया गया है, जहाँ इसके निर्माण प्रक्रिया सम्बन्धित मानचित्रों आदि को दर्शाया गया है। इन स्तम्भों पर चढ़ा जा सकता है, जहाँ से शहर का मनोरम दृश्य नजर आता है।

ला पेड्रेराः यह गाउडी की एक और महानकृति है। ला पेड्रेरा १९०५ और १९१० के बीच, कार्यालाय और निवास के लिये संयुक्त रुप से बनाया गया था। पहले यह कासा मिल के नाम से जाना जाता था। अब ला पेड्रेरा के नाम से ही ज्यादा जाना जाता है, क्योंकि इसके बाहरी भाग में लगे असमान धूसर पत्थर रास्ते के कोनों से एक लहर पैदा करती हैं। पर्यटक महल का दर्शन कर सकते हैं, और छत पर भी जा सकते हैं। जहाँ मध्यकालिन राजाओं के घरों की तरह विशाल रंग बिरंगे चिमनी हैं। छत बार्सिलोना के मनोरम दृश्य को देखने के लिये खुली है। छत के एक तल नीचे एक आधुनिक संग्राहलय है जो गाउडी को समर्पित है।

पार्क ग्वेलः गाउडी के समर्थक यूसेबी ग्वेल एक उपनगर की स्थापना करना चाहता था। उसकी सम्पत्ती बार्सिलोना से थोड़ा उपर, शहर के उत्तर-पश्चिम में थोड़ी ही दुरी पर था। वहाँ ६० से ज्यादा घर बनाने के लिये प्लॉट थे जिनमें से सिर्फ पर दो में ही घर बन पाया था। यह परियोजना अपने समय से परे था और विफल हो गया। बार्सिलोना सिटि काउंसिल ने १९२२ में इस सम्पत्ती को खरीद लिया और यहाँ म्यून्सिपल पार्क बना दिया। गाउडी नें जमीन को समान नही किया, जिससे कि पार्क में घुमावदार सड़कों का एक जाल बन गया है, जो कि जमीन के बनावट के अनूरुप चलता है। सबसे निचले स्थान पर अन्दर जाने का रास्ता है।

ग्वेल महलः १९८८ में एनटॉनियो गाउडी द्वारा इसे बनाया गया था। महल के लॉबी में समानरुप से पालिश किये हुए भूरे रंग के तीन विशाल परवलयाकार के स्तम्भ हैं, जो कि खिड़कियों से आने वाले प्रकाश को शोख लेते हैं। जिससे यह प्रतित होता है कि ये गोथिक खिड़कियाँ है, लेकिन ग्वेल महल में गाउडी द्वारा बनाये गये ये खिड़कियाँ वास्तव में आयाताकार हैं। इससे उनके 'नौवेओ' कला के प्रति नापसंदगी में आई कमी भी जाहिर होता है। 'नौवेओ' कला के तत्व प्रवेशद्वार के साथ-साथ महल के अन्दर भी दोहराया गया है। महल के केन्द्र में तीनो तलों को मिलाकर एक महाकक्ष बनाया गया है। जिसमें ऐसा लगता है मानो आप एक विशाल चर्च में खड़े हों। इस कमरे के उपर एक गुम्बद लगा है, जिसमे गाउडी ने गोल गोल छेद कर दिया है।

ग्रेशियाः १९ वीं शताब्दी से ही यह एक उपनगर है। ग्रेशिया कलाकारों, छात्रों, बुद्धिजीवियों के लिये एक मिश्रित निवाश स्थान है। यहाँ सुन्दर ‍‍- सुन्दर उद्यानें है, जहाँ दिन में मनोरंजन और रात, मौजमस्ती भरे मेलमिलाप के लिये लोकप्रिय है। कभी यह L’Eixample के उत्तर में अलग एक गाव हुआ करता था, १९ शताब्दी में यह औद्योगिक जिला, जो अपने लोकतंत्रवादी सिद्धांतो के लिये जाना जाता था। १८९७ में ग्रेशिया को बार्सिलोना में मिला दिया गया। उनदिनों यहाँ कई क्षेत्रों में सुधार की जरुरत थी। रास्ते, विद्यालय, स्वास्थ्य केन्द्र की खस्ता हालत थी और निकासी की भी कोई व्यवस्था नही थी। लेकिन आजकल परिस्थितियाँ अलग है। प्लेका डेल सोल दिन में बैठने के लिये मनोरम स्थान है, जो कैफे और १९ वीं शताब्दी के अस्थापत्यों से घिरा है।

मोन्ट्जुइकः मोन्ट्जुइक में कई कला चित्रशाला, मनोरम उद्यान, आराम से समय बिताने का स्थान और १९९२ के आलम्पिक खेल के मुख्य आयोजन स्थल हैँ। प्लेका डि स्पेन्या से यहाँ पहुँचते वक्त, उत्तर दिशा में आपको प्लेका डि ब्रौस स्मारक दिखेगी, जो पहले सांडो को लड़ाने का स्थान था। १९६६ की लड़ाई भी यहीं हुई थी। इसके पीछे पार्क जोआन मिरो है, जहाँ मिरो द्वारा बनायी गयी मूर्ति 'डोना आइ ओशेल' ( औरत एवं पक्षी ) है। पास ही 'पलाउ नेशियोनल' में 'म्युजियो नेशियोनल डि आर्ट डि कैटालुनिया' है, जहाँ रोमनीय कला का संग्रह है। श्रृंखला में आगे बढ़ते हुए, पलाउ नेशियोनल के नीचे कई फौवरे मिलते है, जसमे ला फोन्ट मेजिका सबसे बड़ा है, जहाँ गर्मियों के शाम में होने वाले मुफ्त संगीत समारोह में यह और भी जीवन्त हो उठता है। मोन्ट्जुइक के उत्तर पश्चिम में स्पेनिश गांव पॉब्ले स्पेन्योल है। पहले तो यह एक आम पर्यटन स्थल जैसा ही दिखता है, लेकिन यह अपने आपको स्पेनिश अस्थापत्य का एक सुन्दर दर्पण भी साबित करता है। स्पेन के सभी विख्यात महलो की नकल यहाँ मिल जाती है। ' दि अनेला आलिम्पिका' में १९९२ के आलम्पिक के मुख्यखेलों का आयोजन हुआ था। चोटी से नीचे ' दि फण्डाशियो जोआन मिरो' में आप एक अलग ही कलाकृति से रुबरु होंगे, जो कि २० वीं शताब्दी के इस महान कलाकार की चित्रशाला है। यह उनके कार्यों का सबसे बड़ा संग्रह है।

मोनेस्टिर डि मोन्ट्सेराटः मोन्ट्सेराट, बार्सिलोना के उत्तर-पश्चिम में ५० कि.मि.(३१ मील) की दूरी पर है। यहाँ जादूई पत्थरीला रास्ता, सन्यासियों की जर्जर गुफायें, एक आश्रम और कोस्टा ब्रावा में छुट्टियों में आराम करते पर्यटकों का समुह मिलता है। मोनेस्टिर डि मोन्ट्सेराट की स्थापना १०२५ में वर्जिन मेरी की याद में बनाया गया था। आजकल यहाँ लगभग ८० सन्यासी रहते है और तीर्थयात्री ला मोरेन्टा के दर्शन के लिये आते हैं जो कि १२ वीं शताब्दी में शिशू जिसस के साथ मेरी की रोमनीयकला में बनी लकड़ी की मूर्ति है। यहाँ पहुँचने का सबसे नाटकीय साधन केबल कार है, जो आपको पहाड़ों के बीच से एक रोमांचकर यात्रा के बाद आश्रम के ठीक नीचे पहुँचा देता है।

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